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उत्पन्ना एकादशी 2026: तिथि, पारण समय, व्रत कथा

उत्पन्ना एकादशी 2026: तिथि, पारण समय, व्रत कथा

उत्पन्ना एकादशी 2026: 4 दिसंबर को व्रत, 5 दिसंबर पारण समय, व्रत कथा, पूजा विधि व नियम। द्रिक पंचांग से सत्यापित।

उत्पन्ना एकादशी 2026 मार्गशीर्ष (अगहन) मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुईं, जिन्हें "एकादशी देवी" कहा गया। इसलिए जो भक्त साल भर एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, वे अक्सर उत्पन्ना एकादशी से ही इसकी शुरुआत करते हैं। इस लेख में आप उत्पन्ना एकादशी 2026 की सही तारीख, तिथि का समय, पारण का समय, व्रत कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम पढ़ेंगे। सभी समय द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) से सत्यापित हैं।


उत्पन्ना एकादशी 2026: तिथि व पारण समय

द्रिक पंचांग के अनुसार उत्पन्ना एकादशी का व्रत शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को रखा जाएगा।


  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 3 दिसंबर 2026, रात 11:03 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 4 दिसंबर 2026, रात 11:44 बजे
  • पारण (व्रत खोलने) का समय, नई दिल्ली: 5 दिसंबर 2026, सुबह 6:59 से 9:04 बजे तक
  • पारण का समय, उदयपुर: 5 दिसंबर 2026, सुबह 7:05 से 9:13 बजे तक (द्रिक पंचांग, उदयपुर)
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 6 दिसंबर 2026, रात 12:51 बजे

पारण का समय हर शहर में सूर्योदय के हिसाब से थोड़ा बदलता है। अपने शहर का सटीक समय तिथिगुरु ऐप में देखें। साल की सभी एकादशी तिथियों के लिए हमारी एकादशी 2026-2027 लिस्ट भी पढ़ें।


उत्पन्ना एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में बताई गई कथा के अनुसार एकादशी देवी का जन्म इसी तिथि को हुआ, इसलिए इसे एकादशी की "जन्म तिथि" माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत से पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मन शुद्ध होता है। अंत में भक्त को भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष मास को स्वयं श्रीकृष्ण ने गीता में "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्" कहकर श्रेष्ठ बताया है, इसलिए इस महीने की एकादशी का पुण्य और बढ़ जाता है।

जो लोग पहली बार एकादशी व्रत रखना चाहते हैं, उनके लिए उत्पन्ना एकादशी सबसे शुभ शुरुआत मानी जाती है। कई परिवार इसी दिन से साल भर की 24 एकादशियों का संकल्प लेते हैं।


उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

मुर दैत्य का आतंक

सतयुग में मुर नाम का एक बलशाली दैत्य था। उसने इंद्र समेत सभी देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। दुखी देवता भगवान शिव के पास गए, और शिवजी ने उन्हें क्षीरसागर में भगवान विष्णु की शरण में जाने को कहा। देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने मुर से युद्ध किया। यह युद्ध हजारों वर्षों तक चला।

बद्रिकाश्रम की गुफा और देवी का प्रकट होना

लंबे युद्ध के बाद भगवान विष्णु विश्राम के लिए बद्रिकाश्रम की हेमवती नाम की गुफा में चले गए और योगनिद्रा में लीन हो गए। मुर उन्हें मारने के इरादे से वहां पहुंचा। उसी समय भगवान के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुईं। उन्होंने मुर को युद्ध के लिए ललकारा और उसका वध कर दिया।

भगवान विष्णु का वरदान

जागने पर भगवान विष्णु ने देखा कि दैत्य मरा पड़ा है। कन्या ने पूरी बात बताई। प्रसन्न होकर भगवान ने कहा, "तुम एकादशी तिथि को प्रकट हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। जो भी तुम्हारा व्रत करेगा, उसके सब पाप नष्ट होंगे और उसे मेरा धाम मिलेगा।" तभी से एकादशी व्रत की परंपरा शुरू हुई और इस तिथि का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा।


उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि

  1. दशमी की तैयारी: 3 दिसंबर (दशमी) को सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  2. स्नान व संकल्प: 4 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, पीले वस्त्र पहनें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  3. पूजन: भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। पीले फूल, चंदन, अक्षत, धूप-दीप, तुलसी दल और फल-मिठाई का भोग लगाएं।
  4. मंत्र जाप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  5. कथा व आरती: उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें, फिर आरती करें। भजन-कीर्तन के लिए TithiguruTv+ पर भक्ति वीडियो देख सकते हैं।
  6. रात्रि जागरण: संभव हो तो रात में भजन-कीर्तन करें।
  7. पारण: 5 दिसंबर को ऊपर बताए पारण समय में ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देकर व्रत खोलें।

पूजा के लिए दीपक, धूप, तुलसी माला और अन्य सामग्री तिथिगुरु शॉप पर मिलती है।


क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • फलाहार, दूध, मेवे या साबूदाना-कुट्टू जैसे व्रत के भोजन लें, या अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल व्रत रखें।
  • दिन भर भगवान का स्मरण करें, गीता या विष्णु सहस्रनाम पढ़ें।
  • अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
  • पारण समय पर ही व्रत खोलें। हरि वासर में पारण न करें।

क्या न करें

  • चावल और अनाज न खाएं। एकादशी पर चावल खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
  • प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • क्रोध, झूठ, निंदा और विवाद से बचें।
  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले तोड़ लें।
  • दिन में सोने से बचें।

अपनी राशि के अनुसार दिन कैसा रहेगा, यह जानने के लिए आज का राशिफल देखें।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को है। तिथि 3 दिसंबर रात 11:03 बजे शुरू होकर 4 दिसंबर रात 11:44 बजे समाप्त होगी।

उत्पन्ना एकादशी 2026 का पारण समय क्या है?

नई दिल्ली में पारण 5 दिसंबर 2026 को सुबह 6:59 से 9:04 बजे तक है। उदयपुर में यह सुबह 7:05 से 9:13 बजे तक है।

उत्पन्ना एकादशी क्यों मनाई जाती है?

इस दिन भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया। इसलिए इसे एकादशी व्रत की जन्म तिथि माना जाता है।

क्या एकादशी व्रत उत्पन्ना एकादशी से शुरू करना चाहिए?

हां, परंपरा के अनुसार साल भर के एकादशी व्रत का संकल्प उत्पन्ना एकादशी से लेना सबसे शुभ माना जाता है।

उत्पन्ना एकादशी पर क्या खाएं?

फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक ले सकते हैं। चावल और अनाज न खाएं।


English Summary

Utpanna Ekadashi 2026 falls on Friday, 4 December 2026 (Margashirsha Krishna Ekadashi). The Ekadashi tithi begins at 11:03 PM on 3 Dec and ends at 11:44 PM on 4 Dec. Parana (breaking the fast) is on 5 Dec, from 6:59 to 9:04 AM in New Delhi and from 7:05 to 9:13 AM in Udaipur, per Drik Panchang. The day marks the appearance of Goddess Ekadashi from Lord Vishnu, who slew the demon Mura. That makes it the traditional day to begin the year-long Ekadashi vow. Avoid rice and grains, worship Vishnu with tulsi, and break the fast within the parana window. Check city-wise timings in the Tithiguru app.

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