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गोवर्धन पूजा 2026: अन्नकूट मुहूर्त, विधि व कथा

गोवर्धन पूजा 2026: अन्नकूट मुहूर्त, विधि व कथा

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। दिल्ली में प्रातः मुहूर्त 6:40–8:50 AM; उदयपुर में 9 नवंबर, 3:38–5:51 PM। जानें विधि व कथा।

गोवर्धन पूजा 2026 कब है? द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है, जिसका प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 06:40 से 08:50 बजे तक (2 घंटे 10 मिनट) है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 2026 में दिवाली (8 नवंबर) और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर है, और उदयपुर जैसे पश्चिमी शहरों के लिए द्रिक पंचांग गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 नवंबर को सायंकाल मुहूर्त में बता रहा है। इस लेख में जानें गोवर्धन पूजा 2026 की तिथि, प्रतिपदा का समय, शहरवार मुहूर्त, अन्नकूट की पूजा विधि, गोवर्धन पर्वत की कथा और जरूरी नियम।


गोवर्धन पूजा 2026 तिथि और प्रतिपदा का समय

गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। ज्यादातर वर्षों में यह दिवाली के अगले दिन आती है, लेकिन जब प्रतिपदा तिथि दोपहर बाद शुरू होती है, तब दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर आ जाता है। 2026 में यही स्थिति है।


  • दिवाली लक्ष्मी पूजन: रविवार, 8 नवंबर 2026
  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 10 नवंबर 2026, दोपहर 02:00 बजे
  • गोवर्धन पूजा (नई दिल्ली): मंगलवार, 10 नवंबर 2026
  • द्यूत क्रीड़ा: मंगलवार, 10 नवंबर 2026

गोवर्धन पूजा 2026 शुभ मुहूर्त (शहरवार)

नई दिल्ली: प्रातःकाल मुहूर्त

नई दिल्ली में गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को है। प्रातःकाल पूजा मुहूर्त सुबह 06:40 से 08:50 बजे तक रहेगा। इसी समय गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा और अन्नकूट का भोग लगाना श्रेष्ठ माना गया है।

उदयपुर: सायंकाल मुहूर्त

उदयपुर (राजस्थान) के लिए द्रिक पंचांग गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 नवंबर 2026 को बताता है, जिसका सायंकाल मुहूर्त दोपहर 03:38 से शाम 05:51 बजे तक (2 घंटे 13 मिनट) है। स्थानीय सूर्योदय के अंतर के कारण अलग-अलग शहरों में पूजा का दिन बदल सकता है, इसलिए अपने शहर का सही दिन और समय तिथि गुरु ऐप में जरूर देखें या अपने कुल पुरोहित से पुष्टि करें।


गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महत्व

गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा का पर्व है। इसे अन्नकूट भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन गेहूं, चावल, बेसन की कढ़ी, पत्तेदार सब्जियों और तरह-तरह के पकवानों का "अन्न का पहाड़" बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और नाथद्वारा (राजस्थान) में अन्नकूट महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसी दिन को बलि प्रतिपदा या पाड़वा के रूप में मनाया जाता है, जो वामन भगवान द्वारा राजा बलि को पाताल भेजने की स्मृति है। गुजरात में यह दिन नव वर्ष (बेस्तु वरस) के रूप में भी मनाया जाता है।


गोवर्धन पर्वत की कथा

द्वापर युग में ब्रजवासी हर वर्ष वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गायों को चारा, जल और आश्रय गोवर्धन पर्वत से मिलता है, इसलिए पूजा गोवर्धन की होनी चाहिए। ब्रजवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रज पर मूसलधार वर्षा शुरू कर दी।

तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली (कनिष्ठिका) पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिनों तक सभी ब्रजवासियों, गायों और ग्वालों को उसके नीचे सुरक्षित रखा। अंत में इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। तभी से श्रीकृष्ण को गिरिधारी और गोवर्धनधारी कहा जाता है और हर वर्ष यह पर्व प्रकृति, अन्न और गौ सेवा के प्रति कृतज्ञता के रूप में मनाया जाता है।


गोवर्धन पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)

1. तैयारी

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के आंगन या पूजा स्थान को साफ कर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। कई परिवार इसे लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाते हैं और फूलों, दूब और सींकों से सजाते हैं। जहाँ गोबर उपलब्ध न हो, वहाँ मिट्टी या अन्न से प्रतीकात्मक गोवर्धन बनाया जा सकता है।

2. पूजन

गोवर्धन जी के पास श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र रखें। रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, दूध, दही, शहद और बताशे अर्पित करें। "ॐ गोवर्धनधारिणे नमः" या "श्री गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण" का जाप करें।

3. परिक्रमा

परिवार के साथ गोवर्धन की सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा के समय जल का लोटा हाथ में लेकर धार गिराते हुए चलें और जौ बोते चलें, यह परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

4. अन्नकूट भोग

कम से कम छप्पन भोग या जितने संभव हों उतने सात्विक पकवान बनाएं: कढ़ी-चावल, बाजरे की खिचड़ी, मौसमी सब्जियों की मिक्स सब्जी (अन्नकूट की सब्जी), पूरी, खीर, लड्डू और मिठाइयाँ। सबको एक साथ पर्वत के आकार में सजाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाएं और फिर प्रसाद सबमें बाँटें।

5. गौ पूजा

इस दिन गायों और बछड़ों को स्नान कराकर, तिलक लगाकर और गुड़-रोटी खिलाकर उनकी पूजा करें। गौ सेवा को इस पर्व का सबसे पुण्य कार्य माना गया है।


गोवर्धन पूजा के नियम: क्या करें, क्या न करें

  • पूजा अपने शहर के शुभ मुहूर्त में ही करें; पंचांग में दिया दिन देखें।
  • अन्नकूट का भोग पूरी तरह सात्विक रखें; प्याज-लहसुन का प्रयोग न करें।
  • गोवर्धन पूजा बंद कमरे में न करें; आंगन या खुले स्थान में करना शुभ माना गया है।
  • परिक्रमा कभी अधूरी न छोड़ें और गौ माता का अनादर न करें।
  • प्रसाद में से गाय, पक्षियों और जरूरतमंदों के लिए हिस्सा अवश्य निकालें।

दीपोत्सव 2026 के बाकी पर्व

गोवर्धन पूजा पाँच दिवसीय दीपोत्सव का चौथा पर्व है। पूरी जानकारी के लिए हमारे लेख पढ़ें: धनतेरस 2026 खरीदारी मुहूर्त, नरक चतुर्दशी 2026 अभ्यंग स्नान और दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त।

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गोवर्धन पूजा 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गोवर्धन पूजा 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है। उदयपुर के लिए यह सोमवार, 9 नवंबर बताई गई है।

गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 06:40 से 08:50 बजे तक है। उदयपुर में सायंकाल मुहूर्त 9 नवंबर को दोपहर 03:38 से शाम 05:51 बजे तक है।

2026 में दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा क्यों नहीं है?

क्योंकि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होगी, इसलिए दिवाली (8 नवंबर) और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर है।

अन्नकूट में क्या भोग लगाया जाता है?

कढ़ी-चावल, बाजरा, मिक्स सब्जी, पूरी, खीर, लड्डू और छप्पन भोग जैसे सात्विक पकवान पर्वत के आकार में सजाकर श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं।

गोवर्धन पूजा पर कौन सा मंत्र बोलें?

"ॐ गोवर्धनधारिणे नमः" और "श्री गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण" का जाप शुभ माना जाता है।


English Summary

Govardhan Puja 2026 (Annakut) falls on Tuesday, 10 November 2026 in New Delhi, with the Pratahkala muhurat from 06:40 AM to 08:50 AM, per Drik Panchang. For Udaipur, Drik Panchang lists Monday, 9 November, with a Sayankala muhurat from 03:38 PM to 05:51 PM. Kartik Shukla Pratipada runs from 12:31 PM on 9 Nov to 02:00 PM on 10 Nov, which is why there is a one-day gap after Diwali (8 Nov). Make a Govardhan from cow dung, offer an Annakut of sattvic dishes to Lord Krishna, do seven parikramas and serve cows. Check your city's timing in the Tithi Guru app, shop puja items at the Tithiguru store and watch Krishna serials free on TithiguruTv+.

स्रोत: द्रिक पंचांग – गोवर्धन पूजा 2026 (नई दिल्ली) और उदयपुर (23 अक्टूबर 2026 को सत्यापित)।

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